गुजरात सरकार ने बुधवार को राज्यभर में एनालॉग पनीर, चीज और मक्खन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने यह फैसला लोगों के स्वास्थ्य, उपभोक्ता सुरक्षा और राज्य के डेयरी उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत यह आदेश जारी किया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की गई जांच और प्रयोगशाला परीक्षणों में कई स्थानों पर घटिया गुणवत्ता वाले गैर-दुग्ध उत्पाद पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया।
सरकार ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या खाद्य व्यवसाय संचालक के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी दिन पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र ने भी एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला लिया।
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क्या है एनालॉग पनीर और क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
एनालॉग पनीर असली दूध से बने पनीर का विकल्प होता है, लेकिन इसे दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य रासायनिक पदार्थों से तैयार किया जाता है। इसकी उत्पादन लागत कम होने के कारण यह बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होता है।
हालांकि, इसमें पारंपरिक दूध से बने पनीर की तुलना में प्रोटीन और पोषण की मात्रा कम होती है। गुजरात सरकार के अनुसार, कई उपभोक्ता इसे असली दूध से बना पनीर समझकर खरीद लेते हैं, जबकि जांच में पाया गया कि कुछ उत्पादों को पनीर जैसा दिखाकर बेचा जा रहा था।
सरकार ने कहा कि ऐसी गतिविधियां उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के साथ-साथ असली डेयरी उत्पाद बनाने वाले किसानों और निर्माताओं को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया उपभोग के लिए अनुपयुक्त
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पनसेरिया ने कहा कि राज्य का खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (एफडीसीए) पिछले चार महीनों से एनालॉग पनीर और अन्य संबंधित उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा था।
उन्होंने कहा कि जांच में पाया गया कि एनालॉग पनीर स्वास्थ्य और पोषण की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। इसलिए राज्य में इसके उत्पादन, बिक्री और परिवहन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है।
डेयरी उद्योग की सुरक्षा पर सरकार का जोर
गुजरात सरकार ने कहा कि राज्य देश के प्रमुख डेयरी उत्पादक राज्यों में शामिल है और यहां लाखों दूध उत्पादक किसान जुड़े हुए हैं। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना और वास्तविक डेयरी उत्पादकों के हितों की रक्षा करना जरूरी है।
सरकार ने निर्माताओं, थोक विक्रेताओं, व्यापारियों, होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य कारोबारियों से अपील की है कि वे केवल वास्तविक दूध से बने उत्पादों का उपयोग करें और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करें।
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