गुजरात में आयोजित VGRC (वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस) के दूसरे दिन ‘गुजरात ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2025’ पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान राज्य में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2035 तक 3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन हासिल करना है। यह लक्ष्य भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत उपलब्ध बुनियादी ढांचे और नियामक सहायता पर मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही बायोमास आधारित और इलेक्ट्रोलिसिस आधारित परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों पर भी चर्चा हुई।
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सेमिनार में यह भी बताया गया कि राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी।
विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा जरूरतों का एक महत्वपूर्ण समाधान है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
कार्यक्रम में नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने मिलकर इस क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
VGRC के इस सत्र को गुजरात को हरित ऊर्जा के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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