गुजरात हाईकोर्ट ने शनिवार को "न्यायिक और कोर्ट प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर नीति" जारी की, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि AI का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों, कानूनी शोध, केस प्रबंधन, और अनुवाद के लिए किया जा सकता है। यह नीति विशेष रूप से निर्णय लेने, न्यायनिर्णय, और तर्क प्रक्रिया में AI के उपयोग को निषेध करती है।
इस 12 पृष्ठीय नीति को सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश विक्रम नाथ ने वडोदरा में उद्घाटित किया। यह नीति राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों, उच्च न्यायालय के कर्मचारियों, कानूनी सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायपालिका, और कोर्ट से संबंधित सभी कार्यों पर लागू होगी। इसमें कोर्ट परिसर में या दूरस्थ रूप से किए जाने वाले सुनवाई, केस प्रबंधन, रजिस्ट्री कार्य, प्रशासनिक कार्य, और अनुसंधान गतिविधियों को शामिल किया गया है।
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि मानव निर्णय हमेशा "सिद्धांत, तर्क, कानून, और संविधानिक मूल्यों द्वारा मार्गदर्शित" होना चाहिए और यह निष्कलंक रूप से बने रहना चाहिए, ताकि निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित हो सके। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि AI का उपयोग केवल उन कार्यों में किया जाएगा जो न्यायिक निर्णयों से संबंधित नहीं होंगे।
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यह नीति उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है और इसके लागू होने से न्यायिक कार्यों में प्रभावी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
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