गुजरात विधानसभा ने सात घंटे से अधिक चली मैराथन बहस के बाद समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इसे ऐतिहासिक सुधार बताया, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका जोरदार विरोध किया।
‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए धर्म से परे एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। इसे ध्वनि मत से पारित किया गया, जबकि विपक्ष ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की थी।
इस विधेयक के पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यह कानून पारित किया था।
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विधेयक में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय और कुछ संरक्षित परंपरागत समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसमें लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और समाप्ति की भी व्यवस्था की गई है, साथ ही बहुविवाह पर रोक लगाई गई है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे संविधान आधारित एकीकृत कानून की दिशा में कदम बताया। उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 44 का हवाला देते हुए कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है।
वहीं, कांग्रेस विधायक शैलेश परमार और अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि यह विधेयक जल्दबाजी में लाया गया है और यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य और देश की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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