भारत और फ्रांस ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक रक्षा सहयोग समझौते को नवीनीकरण किया, जिसके तहत भारत में फ्रांसीसी मिसाइलों के उत्पादन का करार हुआ। इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके फ्रांसीसी समकक्ष कैथरीन वॉत्रिन के बीच बेंगलुरु में वार्ता के दौरान भारतीय और फ्रांसीसी सैनिकों की आपसी तैनाती पर भी सहमति बनी।
वार्ता के दौरान राजनाथ सिंह ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान में 'मेड इन इंडिया' घटकों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का अनुरोध किया। यह समझौता 3.25 लाख करोड़ रुपये के नए राफेल सौदे से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारत में राफेल विमान के 114 विमानों की खरीद और उत्पादन शामिल है।
भारत और फ्रांस के रक्षा मंत्रालयों के अनुसार, दोनों देशों ने रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारतीय और फ्रांसीसी उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से उच्च तकनीक क्षेत्रों में।
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भारत में बने राफेल घटक क्या होंगे?
इस नवीनीकरण समझौते में भारत में HAMMER मिसाइलों, M88 राफेल इंजन और एरो इंजन पार्ट्स के उत्पादन की बात शामिल है। भारत में इंजन असेंबली लाइन की स्थापना और भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से पुर्जे मंगाने के लिए फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान ने पहले ही प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, HAL और सफ्रान के बीच MoU भी हुआ है, जिसके तहत भारत में एरो-इंजन के महत्वपूर्ण पुर्जे बनाए जाएंगे।
भारत और फ्रांस के बीच यह रक्षा सहयोग पहले से मजबूत हुआ है, विशेष रूप से ऐसे उच्च तकनीकी क्षेत्र में जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हैं।
इस सौदे के तहत, 18 राफेल विमान फ्रांस से तैयार हालत में भारत को मिलेंगे, जबकि बाकी 96 विमान भारत में बनाए जाएंगे। भारत की इच्छा है कि इन विमानों में 50 से 60 प्रतिशत तक स्थानीय सामग्री का उपयोग हो। हालांकि, यह सौदा अभी प्रारंभिक चरण में है और इसकी तकनीकी समीक्षा, लागत वार्ता और सुरक्षा मंत्रिमंडल से अंतिम अनुमोदन बाकी है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने इस समझौते के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने और दोनों देशों की सामूहिक क्षमता को बढ़ाने के लिए काम करने पर सहमति जताई।
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