दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने रविवार को कर्तव्य पथ पर डिस्लेक्सिया के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित एक मार्च में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने इस स्थिति से प्रभावित बच्चों की जल्द पहचान और उन्हें उचित सहयोग देने के महत्व पर बल दिया।
मल्होत्रा ने कहा कि डिस्लेक्सिया की पहचान में माता-पिता, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्थिति से ग्रस्त बच्चों को कम बुद्धिमान या अवधारणाएं समझने में कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए मल्होत्रा ने कहा, "अक्टूबर महीने को सरकार द्वारा विशेष रूप से डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों के लिए मान्यता दी गई है और विशेष रूप से अक्टूबर के अंतिम रविवार को पूरे देश में डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों और व्यक्तियों द्वारा एक मार्च आयोजित किया जाता है। यहां दिल्ली में भी हमारे बहुत वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद तरुण विजय जी ने मुझे आमंत्रित किया और उनके निमंत्रण पर मैं कर्तव्य पथ पर डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों के लिए इस मार्च में शामिल हुआ हूं। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों की पहचान करना, विशेष रूप से उनके माता-पिता द्वारा, अत्यंत आवश्यक है। कई बार माता-पिता यह मान लेते हैं कि बच्चा ज्यादा समझ नहीं पाता या वह बुद्धिमान नहीं है। लेकिन यकीन मानिए, यह सिर्फ एक ऐसी स्थिति है जिसे पहचानने की जरूरत है; डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चे वास्तव में बहुत बुद्धिमान होते हैं। मानो ईश्वर ने उन्हें कुछ विशिष्ट उपहार दिया हो।"
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मल्होत्रा ने शिक्षा व्यवस्था में डिस्लेक्सिया को अधिक मान्यता देने की जरूरत पर भी जोर दिया और परीक्षाओं के दौरान प्रभावित छात्रों के लिए किए गए प्रावधानों का उल्लेख किया। उन्होंने माता-पिता से इस स्थिति को समझने और संभावित लक्षणों की पहचान करने का आग्रह किया ताकि बच्चों को उचित सहयोग मिल सके।
उन्होंने कहा, "उनकी क्षमताओं को पहचानना ही महत्वपूर्ण है। अब सरकार ने भी औपचारिक रूप से उन्हें मान्यता देना शुरू कर दिया है और उन्हें दिव्यांगता की सूची में शामिल किया है। हमारी शिक्षा व्यवस्था में सीबीएसई ने भी उन्हें मान्यता दी है और परीक्षाओं, प्रश्नपत्रों में विशेष प्रावधान तथा समर्पित पहचान प्रदान की है। मुझे लगता है कि यह जागरूकता अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले माता-पिता को यह पहचानना होगा कि उनके बच्चे में डिस्लेक्सिया की समस्या है। उन्हें यह समझना होगा कि डिस्लेक्सिया क्या है। एक बच्चा 'बी' अक्षर को उल्टा लिख सकता है या गणित में थोड़ी कठिनाई महसूस कर सकता है। उदाहरण के लिए, 1+1 में बच्चे ने '2' को उल्टा लिखा है। यह डिस्लेक्सिया का एक लक्षण है।"
डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों के समर्थन के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि माता-पिता, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को मिलकर उनकी जरूरतों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें उचित सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "इसलिए शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को भी इसे पहचानना चाहिए। ये हमारे विशेष बच्चे हैं और एक बार पहचान हो जाने पर हमें—माता-पिता, शिक्षकों और समाज को—उनके साथ बातचीत कर उन्हें तदनुसार सहयोग देना चाहिए। डिस्लेक्सिया के बारे में जागरूकता फैलाने की यह एक बहुत सराहनीय पहल है। मैं तरुण विजय जी और उनकी टीम का हार्दिक धन्यवाद देता हूं।"
कर्तव्य पथ पर आयोजित यह मार्च डिस्लेक्सिया की जागरूकता और जल्द पहचान के महत्व को उजागर करने के लिए आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य माता-पिता और शिक्षकों को प्रभावित बच्चों की क्षमताओं को पहचानने और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
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