हरियाणा सरकार ने राज्य के नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की जारी हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने 6 अगस्त से ड्यूटी से अनुपस्थित सफाई कर्मचारियों और सीवरमैन को 5 सितंबर तक काम पर लौटने का निर्देश दिया है। सरकार ने चेतावनी दी है कि तय समय सीमा तक ड्यूटी पर वापस नहीं आने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने नगर निगम आयुक्तों और जिला नगर आयुक्तों को निर्देश जारी कर आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार ने सफाई व्यवस्था को आवश्यक सेवा बताते हुए शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और सीवर व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने पर जोर दिया है।
सरकार के मुताबिक, हड़ताल के दौरान कई सफाई कर्मचारी और सीवरमैन लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित हैं। प्रदर्शन के दौरान सफाई उपकरणों और मशीनरी को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं। इन घटनाओं के संबंध में कुछ हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
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सफाई कर्मचारी 6 अगस्त से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में नौकरी को स्थायी करना शामिल है। लंबे समय से चल रही हड़ताल के कारण कई स्थानों पर कचरे के ढेर जमा हो गए हैं, जिससे सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।
विभाग ने अपने निर्देश में 18 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश का भी हवाला दिया है। अधिकारियों को अदालत और सरकार के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने 12 मांगें स्वीकार करने की बात कही
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में हरियाणा विधानसभा में कहा था कि राज्य सरकार सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार काम कर रही है और उनकी 12 मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सेवाओं को नियमित करने की मांग से जुड़े कई कानूनी पहलू हैं, इसलिए इसकी कानूनी जांच की जा रही है।
वहीं, विपक्ष ने सरकार पर कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री सैनी पर सफाई कर्मचारियों की मांगों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने दावा किया कि कई जगह प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर पुलिस कार्रवाई की जा रही है। इनेलो विधायक आदित्य देवी लाल ने भी सरकार पर कर्मचारियों के साथ अन्याय और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। 1 सितंबर को विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस विधायकों ने भी यह मुद्दा उठाकर विवाद के तत्काल समाधान की मांग की थी।
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