हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस वर्ष किन्नौर कैलाश यात्रा को मंजूरी दे दी है। यह यात्रा 1 जुलाई से 30 जुलाई तक आयोजित की जाएगी। राज्य सरकार ने इस धार्मिक और साहसिक यात्रा के लिए प्रतिदिन अधिकतम 375 श्रद्धालुओं की सीमा निर्धारित की है, ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
राज्य के बागवानी मंत्री नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा के दौरान गाइड और टूर ऑपरेटरों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी सख्त नियम लागू किए गए हैं, ताकि हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
सरकार का यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। किन्नौर कैलाश यात्रा हर साल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण इसे नियंत्रित तरीके से संचालित करना आवश्यक माना जाता है।
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मंत्री नेगी ने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि यात्रा के दौरान सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। साथ ही, यात्रियों को सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि सीमित संख्या में यात्रियों की अनुमति देना हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए जरूरी कदम है।
किन्नौर कैलाश यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक कठिन पर्वतीय यात्रा भी मानी जाती है, जिसमें श्रद्धालुओं को चुनौतीपूर्ण रास्तों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में नियंत्रित व्यवस्था से दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी।
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