हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (एचपीयूटीडब्ल्यूए) ने बुधवार को राज्य के छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलाव के विरोध में प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराने की योजना है।
शिक्षक संघ ने इस बदलाव को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया उच्च शिक्षा संस्थानों की जरूरतों और शैक्षणिक मानकों को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने प्रस्तावित भर्ती व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, राज्य के छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति सार्वजनिक सेवा आयोग यानी लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराने का प्रावधान किया जा सकता है। शिक्षक संगठन इस व्यवस्था को लेकर चिंतित है और उसका मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों की भर्ती प्रक्रिया और शैक्षणिक स्वायत्तता पर प्रभाव पड़ सकता है।
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एचपीयूटीडब्ल्यूए के सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालयों में अलग-अलग विषयों और विभागों की विशेषज्ञ जरूरतें होती हैं। ऐसे में शिक्षकों के चयन के लिए विषय विशेषज्ञों की भूमिका और अकादमिक मानकों को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान संघ के सदस्यों ने सरकार से प्रस्तावित बदलावों पर शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ व्यापक चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में कोई भी परिवर्तन करने से पहले उसके संभावित प्रभावों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
शिक्षक संघ ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष विरोध दर्ज कराया और प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करने की मांग की। संघ का कहना है कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पारदर्शी, निष्पक्ष और अकादमिक आवश्यकताओं के अनुरूप भर्ती व्यवस्था जरूरी है।
छह राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर प्रस्तावित बदलाव अब सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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