ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। हूतियों ने इसे सऊदी अरब के खिलाफ घोषित नौसैनिक नाकाबंदी का हिस्सा बताया। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि इससे लाल सागर भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य की तरह एक नए सामरिक अवरोध क्षेत्र के रूप में उभर सकता है।
उधर, अमेरिकी सेना ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए गए हैं। यह लगातार 12वीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान में सैन्य कार्रवाई की।
यमन स्थित हूती विद्रोही, जो बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते हैं, पहले ही सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा कर चुके हैं। कई रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ईरान की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत वह क्षेत्रीय दबाव बढ़ाकर कूटनीतिक बढ़त हासिल करना चाहता है।
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ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बढ़ते दबाव के कारण पहले ही वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई है। इसका असर महंगाई और ईंधन की कीमतों पर भी पड़ रहा है। इसी बीच लाल सागर में बढ़ते खतरे ने समुद्री व्यापार मार्गों पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को पांच तेल टैंकरों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने के बजाय अपना मार्ग बदल लिया, जबकि चीन और भारत के लिए सऊदी तेल लेकर जा रहे तीन टैंकर मंगलवार को बीच रास्ते से वापस लौट गए।
हूतियों ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने 'एंसेलिया' और 'लैला' नामक दो सऊदी तेल टैंकरों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, एंसेलिया ने संकट संदेश भेजकर बताया कि लाल सागर में सऊदी बंदरगाह जिज़ान के निकट उस पर मिसाइल से हमला हुआ। वहीं लैला पर हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब पिछले कुछ समय से अपने लाखों बैरल तेल को यानबू बंदरगाह के माध्यम से लाल सागर के रास्ते भेज रहा था ताकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बचा जा सके। यदि अब बाब-अल-मंदेब मार्ग भी असुरक्षित हो जाता है तो जहाजों को केवल स्वेज नहर के रास्ते लंबा और महंगा मार्ग अपनाना पड़ेगा।
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर हमला करता है तो अमेरिका ईरान के पुलों या बिजली संयंत्रों जैसे बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। इसके जवाब में ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो वह "एक बूंद तेल का भी निर्यात नहीं होने देगी।"
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिण में विस्फोट की घटना में तीन तेल टैंकर प्रभावित हुए, जिनमें से एक में आग लग गई जबकि दो अन्य वापस लौट गए। गार्ड्स ने यह भी दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और ईरान की अनुमति के बिना कोई भी टैंकर वहां से नहीं गुजर सकेगा।
उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि वह ईरान की समुद्री मार्गों को खतरे में डालने की क्षमता को कमजोर करने के लिए अभियान जारी रखेगा। वहीं ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बुशेहर में भी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जहां देश का एकमात्र संचालित वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है।
युद्ध के कारण दोनों पक्षों में जनहानि लगातार बढ़ रही है। ईरान के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हाल के संघर्ष में दर्जनों नागरिकों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। वहीं अमेरिकी सेना ने भी अपने कई सैनिकों के मारे जाने और सैकड़ों के घायल होने की पुष्टि की है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
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