फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने 18 फरवरी को दिल्ली के AIIMS में अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और फ्रांस, दोनों देश अमेरिका और चीन के मॉडल पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "हम भारत और फ्रांस में एक समान दृष्टिकोण रखते हैं, और यूरोप भी यही मानता है कि हमें न तो पूरी तरह से अमेरिकी मॉडल पर निर्भर होना चाहिए, न ही चीन के मॉडल पर। हम एक व्यापक और स्वतंत्र मॉडल पर विश्वास करते हैं।"
मैक्रोन ने यह भी बताया कि भारत, फ्रांस और यूरोप मिलकर रणनीतिक स्वतंत्रता की दिशा में काम कर रहे हैं। वे एक ऐसा ढांचा तैयार करना चाहते हैं, जो प्रभुत्व के बजाय संप्रभुता को प्राथमिकता देता है।
उन्होंने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि हमारे पास डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमताएं हों, ताकि हम अपनी प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर सकें। यह कंप्यूटिंग क्षमता, प्रतिभा और पूंजी पर आधारित है।" मैक्रोन ने इस त्रयी को स्वतंत्र नवाचार के लिए आधार माना, जो दोनों देशों को बाहरी निर्भरता से मुक्त रखते हुए AI का उपयोग करने में मदद करेगा।
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हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत और फ्रांस अमेरिका और चीन से पीछे हैं, लेकिन वे एआई की दुनिया में प्रतिस्पर्धा में बने हुए हैं। मैक्रोन ने कहा, "हम इस दौड़ में हैं, और हम एआई के क्षेत्र में समाधान प्रदान करने और नैतिक तरीके से इसके लाभों का उपयोग करने में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।"
फ्रांस और भारत के बीच सहयोग को और मजबूत करते हुए, मैक्रोन ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ मिलकर AIIMS में भारत-फ्रांस AI हेल्थ कैम्पस का उद्घाटन किया, जो एआई-चालित स्वास्थ्य देखभाल में नवाचार को बढ़ावा देगा।
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