अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद भारत ने कहा है कि 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्रोतों में विविधता बनाए रखेगा और बदलती बाजार परिस्थितियों के आधार पर फैसले करेगा।
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में पारित ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026’ का संज्ञान लिया है और इस मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रख रही है। मंत्रालय ने कहा कि भारत व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर इस कानून के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए काम करेगा।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को 262-159 मतों से विधेयक पारित किया। यह विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। अमेरिकी सीनेट इसे पिछले महीने 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर चुकी है।
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विधेयक में रूस के तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत और चीन जैसे देशों पर इसका असर पड़ सकता है। इसके अलावा रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले ‘शैडो फ्लीट’ के खिलाफ भी प्रतिबंधों का प्रावधान है।
विधेयक के समर्थन में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने मतदान किया, जबकि सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट इसके खिलाफ रहे। डेमोक्रेटिक सांसदों की आपत्ति मुख्य रूप से ट्रंप को दिए जाने वाले अतिरिक्त टैरिफ अधिकारों को लेकर थी।
विधेयक का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। इसमें ईरान के खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंधों का भी प्रावधान है। भारत ने इस बीच स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय करेगा।
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