भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की गश्त के तौर-तरीकों में बदलाव को लेकर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि जब चीनी सैनिक तय गश्ती व्यवस्थाओं से हटते हैं, तो भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को गलतफहमी और किसी भी तरह की गलत गणना से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र का इस्तेमाल जारी रखना चाहिए।
जायसवाल ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने आने की घटनाओं के संदर्भ में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों पक्ष बातचीत कर रहे हैं। एलएसी की समझ बेहतर बनाने और सीमा प्रबंधन में सुधार के लिए भी चर्चा पर सहमति बनी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
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कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
विदेश मंत्रालय का यह बयान भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ कथित तौर पर जारी टकराव के मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
लद्दाख के 28 स्थानों के नाम पर चीन की आपत्ति खारिज
भारत ने इस महीने लद्दाख के 28 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के मानकीकृत नाम घोषित करने के फैसले पर चीन की आपत्ति को भी खारिज किया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा चीन की आपत्ति से इस तथ्य में बदलाव नहीं होगा।
गृह मंत्रालय ने इन स्थानों के नाम भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए हैं। इनमें एलएसी के पास स्थित गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र भी शामिल हैं। रणधीर जायसवाल के अनुसार, यह प्रक्रिया केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन और स्थानीय हितधारकों से परामर्श के बाद पूरी की गई, ताकि स्थानों की सही पहचान और उनके बारे में जन-जागरूकता बढ़ाई जा सके।
चीन ने फैसले का किया विरोध
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भारत के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि चीन लद्दाख को भारत द्वारा स्थापित केंद्रशासित प्रदेश के रूप में मान्यता नहीं देता। उन्होंने नामकरण को अवैध बताते हुए पश्चिमी क्षेत्र पर चीन का दावा दोहराया।
भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा है।
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