प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (12 जनवरी, 2026) को कहा कि भारत और जर्मनी रक्षा व्यापार को सरल बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे, ताकि दोनों देशों के बीच सह-उत्पादन (को-प्रोडक्शन) और सह-विकास (को-डेवलपमेंट) को बढ़ावा दिया जा सके। इस दिशा में दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक के साझा विकास, संयुक्त निर्माण और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी और भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नया आयाम मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि भारत जर्मनी के साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक नया ‘परामर्श तंत्र’ (कंसल्टेशन मैकेनिज्म) शुरू करेगा। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक आज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र बन चुका है, ऐसे में भारत और जर्मनी का साझा दृष्टिकोण बेहद महत्वपूर्ण है।
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दोनों नेताओं ने आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जर्मनी भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, नियमों और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं।
इस समझौते से न केवल रक्षा क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ेगा, बल्कि भारतीय उद्योगों को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने के नए अवसर भी मिलेंगे। जर्मन चांसलर की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
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