भारत ने उन रिपोर्टों पर तीखी प्रतिक्रिया दी जिनमें दावा किया गया था कि चीन ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद की थी। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने कहा कि ऐसे देश जो स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे को बचाने के प्रयासों का उनके वैश्विक प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ता है।
रंधीर जयसवाल ने बताया, "हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं जो पहले से ज्ञात तथ्यों की पुष्टि करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में हुए आतंकवादी हमलों का एक सटीक, लक्षित और संतुलित जवाब था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और उसके आदेश पर काम करने वाले राज्य-प्रायोजित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था।"
रिपोर्ट के अनुसार, चीन के एक अधिकारी ने माना कि बीजिंग ने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को ऑन-साइट तकनीकी सहायता प्रदान की थी। यह तनाव उस समय बढ़ा जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में लश्कर से जुड़े आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर में आतंकवादी ढांचों पर सैन्य कार्रवाई की।
दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना के चेंग्दू एयरक्राफ्ट डिज़ाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग ने स्वीकार किया कि उन्होंने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा, "सपोर्ट बेस पर हम लगातार जेट विमान के उड़ान भरने की आवाज और एयर रेड सायरन की आवाज सुनते थे। मई में दोपहर तक तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुँच गया था। यह हमारे लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कठिन अनुभव था।"
रंधीर जयसवाल ने कहा, "जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे का समर्थन उनकी प्रतिष्ठा और स्थिति को प्रभावित करता है।"