संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति के 81वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद, परमाणु प्रसार और क्षेत्रीय अस्थिरता के मुद्दों पर कड़ा जवाब दिया। भारतीय राजनयिक अनमोल शेर सिंह बेदी ने स्पष्ट कहा कि भारत सीमा पार आतंकवादी हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा करने का अधिकार रखता है और परमाणु हथियारों की धमकी उसे अपने रुख से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
भारत की ओर से जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रथम सचिव बेदी ने पहलगाम आतंकी हमले, सिंधु जल संधि और परमाणु सहयोग जैसे मुद्दों पर देश का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों के लिए जवाबदेही तय नहीं होने पर शांति संकटों के बीच केवल एक विराम बनकर रह जाती है।
पहलगाम हमले पर भारत का पक्ष
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत का उल्लेख करते हुए बेदी ने कहा कि भारत ने मई में आत्मरक्षा में सैन्य कार्रवाई की थी। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई सीमित, लक्षित और तनाव बढ़ने से रोकने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने परमाणु तनाव बढ़ने की आशंका के आधार पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई को सीमित करने की दलील खारिज की।
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सिंधु जल संधि और परमाणु प्रसार
बेदी ने 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि का जिक्र करते हुए कहा कि यह समझौता आपसी विश्वास और सद्भाव पर आधारित था। उन्होंने कहा कि कोई देश इन आधारों को कमजोर करके समझौते से मिलने वाले लाभों को बरकरार रखने की अपेक्षा नहीं कर सकता।
परमाणु प्रसार के मुद्दे पर उन्होंने ए.क्यू. खान नेटवर्क का उल्लेख किया, जिस पर विदेशों में परमाणु तकनीक और विशेषज्ञता पहुंचाने से जुड़ी चिंताएं रही हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 का हवाला देते हुए देशों से सामूहिक विनाश के हथियारों तक गैर-सरकारी तत्वों की पहुंच रोकने की अपील की।
परमाणु धमकी से नहीं बदलेगा भारत का रुख
बेदी ने कहा कि परमाणु हथियारों को सामान्य कूटनीतिक साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच भारत कोई अंतर नहीं करता।
कश्मीर पर भारत का पक्ष दोहराते हुए उन्होंने क्षेत्र को देश का अभिन्न हिस्सा बताया। बेदी ने कहा कि भारत शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन स्थायी स्थिरता के लिए आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।
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