भारत ने रविवार को बलूचिस्तान में हालिया आतंकी हमलों को लेकर पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने इन आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान हटाने की एक पुरानी रणनीति है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक बयान में कहा कि हर बार किसी हिंसक घटना के बाद भारत पर आरोप लगाना पाकिस्तान की आदत बन चुकी है।
रणधीर जयसवाल ने कहा, “हर हिंसक घटना के बाद निरर्थक आरोप दोहराने के बजाय पाकिस्तान को अपने ही देश में लंबे समय से लंबित जनता की मांगों पर ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का दमन, बर्बरता और मानवाधिकार उल्लंघन का रिकॉर्ड दुनिया से छिपा नहीं है।
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत में आतंकियों के खिलाफ कई जवाबी अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें अब तक कम से कम 15 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं, जबकि 92 आतंकियों को ढेर किया गया है। पाकिस्तानी बलों का दावा है कि क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, दल्बंदीन, खारान, पंजगुर, तुंप, ग्वादर और पसनी जैसे इलाकों में बलूच समूह आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं।
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शनिवार को बलूच समूहों द्वारा किए गए एक आतंकी हमले में 18 नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। पाकिस्तानी सेना ने बयान जारी कर कहा कि पूरे बलूचिस्तान में आतंकियों के खिलाफ सफाई अभियान जारी रहेगा। सेना के अनुसार, पिछले दो दिनों में किए गए अभियानों में तीन आत्मघाती हमलावरों सहित कुल 92 आतंकवादी मारे गए हैं, जिससे मौजूदा अभियान में मारे गए आतंकियों की संख्या बढ़कर 133 हो गई है।
गौरतलब है कि सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) के अनुसार, बलूचिस्तान में हिंसा से होने वाली मौतों की संख्या पिछले साल 787 से बढ़कर इस साल 956 हो गई है, जो करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वहीं, The Indian Witness के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान भर में आतंकी घटनाओं और हिंसा में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
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