भारत ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं की हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। भारत ने इसे अपने आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया और संयुक्त राष्ट्र से दुनिया के अन्य हिस्सों में हो रहे बड़े प्रदर्शनों पर भी समान रूप से ध्यान देने की अपील की।
जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर चिंता जताई थी। इसके जवाब में भारत ने कहा कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां स्वतंत्र मीडिया, मजबूत संस्थान और स्वतंत्र न्यायपालिका मौजूद हैं। भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रतिबंध भी लागू होते हैं।
जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने कहा कि भारतीय नागरिक संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल उचित प्रतिबंधों के अधीन करते हैं। अधिकारियों की कार्रवाई कानून के अनुसार होती है और शिकायतों के समाधान के लिए अदालतों के दरवाजे सभी नागरिकों के लिए खुले हैं।
और पढ़ें: सीजेपी के समर्थन में मुंबई में 400 से अधिक लोग हिरासत में, अभिनेता इमरान खान और तुषार गांधी भी शामिल
भारत ने संयुक्त राष्ट्र से निष्पक्षता और बिना भेदभाव के अपने दायित्वों का पालन करने को कहा। उसका कहना है कि दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले बड़े प्रदर्शनों पर भी समान गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
सीजेपी प्रदर्शन और संयुक्त राष्ट्र की चिंता
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शनिवार को प्रदर्शन का ऐलान किया था। पार्टी ने देशभर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी।
इसके बाद राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके तथा सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका सहित सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। अधिकांश हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ दिया गया, लेकिन इन तीन नेताओं की रिहाई नहीं हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रवक्ता थामीन अल-खीतान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध आवश्यक और आनुपातिक होने चाहिए। संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों की चिंताओं पर सार्थक बातचीत करने का भी आग्रह किया।
और पढ़ें: दिल्ली में अराजकता फैलाने की बड़ी साजिश: सीजेपी के प्रदर्शन पर बोले केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी