भारत ने सात वर्षों बाद प्रतिष्ठित 61वीं अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी – ला बिएनाले दी वेनेजिया में अपनी शानदार वापसी दर्ज कराई है। गुरुवार को वेनिस में भारत के राष्ट्रीय मंडप “जियोग्राफीज ऑफ डिस्टेंस: रिमेम्बरिंग होम” का उद्घाटन किया गया। यह प्रदर्शनी तेजी से बदलती दुनिया में स्मृति, प्रवासन, पहचान और अपनेपन जैसे विषयों को केंद्र में रखती है।
इस प्रदर्शनी का आयोजन भारत के संस्कृति मंत्रालय ने नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर और सेरेंडिपिटी आर्ट्स के सहयोग से किया है। उद्घाटन समारोह वेनिस के ऐतिहासिक आर्सेनाले परिसर में आयोजित हुआ।
इस मौके पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, ला बिएनाले दी वेनेजिया के अध्यक्ष पिएत्रांजेलो बुट्टाफुओको, संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल, इटली में भारत की राजदूत वाणी राव, नीता अंबानी, ईशा अंबानी और सुनील कांत मुंजाल मौजूद रहे।
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प्रदर्शनी का क्यूरेशन अमीन जाफर ने किया है। इसमें समकालीन भारतीय कलाकारों की बड़ी मूर्तियां और इंस्टॉलेशन शामिल हैं। प्रदर्शनी में अलवार बालासुब्रमण्यम, रंजनी शेट्टर, सुमाक्षी सिंह, स्कार्मा सोनम ताशी और असीम वाकिफ की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह मंडप ऐसे आधुनिक भारत को प्रस्तुत करता है जो अपनी जड़ों से जुड़ा होने के साथ भविष्य की ओर भी देखता है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक स्मृति और कला की वैश्विक संवाद स्थापित करने की क्षमता को दर्शाती है।
प्रदर्शनी की प्रमुख आकर्षणों में सुमाक्षी सिंह की “परमानेंट एड्रेस” शामिल है, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने टूट चुके पैतृक घर का धागों से जीवन आकार में पुनर्निर्माण किया है। वहीं रंजनी शेट्टर की “अंडर द सेम स्काई” प्रकृति और फूलों से प्रेरित कलात्मक संरचनाएं प्रस्तुत करती है। असीम वाकिफ की बांस से बनी स्थापना “चाल” आधुनिक भारतीय शहरों के बदलते परिदृश्य को दिखाती है।
इसके अलावा अलवार बालासुब्रमण्यम की “नॉट जस्ट फॉर अस” और स्कार्मा सोनम ताशी की “एकोज़ ऑफ होम” पर्यावरण, स्मृति और सांस्कृतिक निरंतरता जैसे विषयों को सामने लाती हैं।
यह प्रदर्शनी 9 मई से 22 नवंबर तक चलेगी। इसके साथ सेरेंडिपिटी आर्ट्स द्वारा वेनिस में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें भारतीय परंपराओं और आधुनिक कला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
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