भारत ने अक्टूबर 2025 में रूस से कच्चे तेल के आयात में अब तक की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रूस से तेल आयात मूल्य के आधार पर 38% और मात्रा के आधार पर 31% कम हो गया है। यह कमी पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय है और मुख्य रूप से उच्च बेस प्रभाव तथा भारत के कुल तेल आयात में समग्र गिरावट के कारण हुई है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अक्टूबर 2025 में रूस से 3.55 बिलियन डॉलर मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जबकि अक्टूबर 2024 में यह आयात 5.8 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर था। यह रूस से तेल आयात मूल्य में अब तक की सबसे तेज मासिक गिरावट है।
इसके बावजूद, रूस अभी भी भारत के कुल तेल आयात में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले देशों में बना हुआ है। मूल्य और मात्रा दोनों के आधार पर, रूस भारत के तेल आयात का लगभग 32% हिस्सा बनाए हुए है। यह दर्शाता है कि गिरावट के बावजूद भारत-रूस ऊर्जा व्यापार अभी भी मजबूत है।
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भारत द्वारा रूस से आयात में कमी का एक कारण यह भी है कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं, और भारत अपने आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसके साथ ही पेट्रोलियम कंपनियां मध्य पूर्व और अफ्रीका जैसे अन्य क्षेत्रों से अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर तेल खरीदने के विकल्प तलाश रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत की आयात रणनीति वैश्विक तेल बाजार की स्थिति, रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव और भारत की घरेलू मांग पर निर्भर करेगी। हालांकि, फिलहाल अक्टूबर 2025 की यह गिरावट भारत-रूस ऊर्जा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है।
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