प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके का कोलंबो में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के लिए आभार व्यक्त किया। इन अवशेषों की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी 4 से 11 फरवरी तक कोलंबो के गंगारामाया मंदिर में आयोजित की जा रही है।
यह अवशेष गुजरात के अरावली जिले के देवनीमोरी पुरातात्विक स्थल से प्राप्त हुए हैं और पहली बार भारत से बाहर सार्वजनिक दर्शन के लिए प्रदर्शित किए जा रहे हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए भारत सरकार का धन्यवाद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अप्रैल 2025 में उनके श्रीलंका दौरे के दौरान इन अवशेषों को श्रीलंका लाने का निर्णय लिया गया था, ताकि वहां के लोग भगवान बुद्ध के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर सकें। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का करुणा, शांति और सद्भाव का संदेश पूरी मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा।
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भारत के उच्चायोग के अनुसार, यह प्रदर्शनी दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक है। खास बात यह है कि अवशेषों का कोलंबो आगमन श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुआ, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया।
इन अवशेषों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका ले जाया गया। देवनीमोरी स्थल बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक केंद्र है, जहां खुदाई में शारीरिक अवशेषों से जुड़े कलश, तांबे का बॉक्स और सोने-चांदी की पत्तियां मिली थीं। ब्राह्मी लिपि में लिखे एक अभिलेख में इसे “भगवान बुद्ध के शारीरिक अवशेषों का निवास” बताया गया है।
भारत ने इसे सांस्कृतिक कूटनीति और आध्यात्मिक सहयोग का महत्वपूर्ण कदम बताया है, जो दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा।
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