भारत ने गुरुवार को मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परीक्षण रणनीतिक बल कमान (स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड) के नेतृत्व में आयोजित किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने जानकारी देते हुए कहा कि 6 अगस्त 2026 को चांदीपुर से अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। इस परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, "मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया गया। इस प्रक्षेपण ने सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सत्यापित किया।"
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अग्नि-4 मिसाइल की खासियत
अग्नि-4 एक दो चरणों वाली सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जो ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटर से संचालित होती है। यह मिसाइल लगभग 4,000 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखती है।
अग्नि-4 भारत के सामरिक हथियार कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके सफल परीक्षण से देश की रक्षा क्षमताओं और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूती मिली है।
डीआरडीओ ने पहले भी किए कई सफल परीक्षण
इससे पहले जुलाई में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर) का सफल उड़ान परीक्षण किया था। यह परीक्षण 8 जुलाई को किया गया था, जिसमें रॉकेट ने 60 किलोमीटर की न्यूनतम निर्धारित दूरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।
डीआरडीओ के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान रॉकेट ने तय दिशा में उड़ान भरते हुए सभी निर्धारित लक्ष्यों को हासिल किया और सटीकता के साथ लक्ष्य पर प्रहार किया।
इसके अलावा डीआरडीओ ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (एलआरएलएसीएम) का भी सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण ओडिशा के तट के पास किया गया था। इस मिसाइल ने सभी निर्धारित मानकों को पूरा किया।
एलआरएलएसीएम को भारत में ही विकसित किया गया है। इसके प्रमुख सिस्टम और तकनीकी हिस्सों को डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से तैयार किया गया है। बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीई) इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्नि-4 परीक्षण की सफलता पर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और उद्योग सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और मिसाइल विकास कार्यक्रम को और मजबूत बनाते हैं।
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