भारतीय नौसेना को जून महीने में बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। नौसेना अपने बेड़े में पांच प्रमुख स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल करने की तैयारी कर रही है। इनमें दो प्रोजेक्ट-17ए स्टेल्थ फ्रिगेट, एक सर्वेक्षण पोत और दो पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत शामिल हैं। इसे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इन पांच प्लेटफॉर्म में से चार का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) ने किया है, जबकि आईएनएस महेंद्रगिरि का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने किया है। नौसेना में शामिल होने के बाद ये पोत समुद्री सुरक्षा, निगरानी और युद्धक अभियानों को नई मजबूती प्रदान करेंगे।
जीआरएसई द्वारा निर्मित आईएनएस दुनागिरि प्रोजेक्ट-17ए का अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है। यह आधुनिक सेंसर, उन्नत हथियार प्रणालियों और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता से लैस है। इसके शामिल होने से नौसेना की बहुउद्देश्यीय युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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नौसेना आईएनएस संशोधक को भी शामिल करेगी, जो एक बड़ा सर्वेक्षण पोत है। यह समुद्र तल की मैपिंग, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और समुद्री क्षेत्र की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके जरिए नौसेना को रणनीतिक और नौवहन संबंधी गतिविधियों में सहायता मिलेगी।
तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अग्रय और मालवन नामक दो पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धक पोत भी शामिल किए जाएंगे। ये दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।
सूची में शामिल आईएनएस महेंद्रगिरि भी प्रोजेक्ट-17ए का आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है। यह लंबी दूरी के समुद्री अभियानों और जटिल युद्धक परिस्थितियों में नौसेना की क्षमता को बढ़ाएगा।
इन पांच स्वदेशी प्लेटफॉर्म की तैनाती भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, समुद्री शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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