भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता रीमा नानावटी को महिलाओं के अधिकारों, शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 का हिलेरी रोडम क्लिंटन पुरस्कार प्रदान किया गया है। गुरुवार को जॉर्जटाउन इंस्टीट्यूट फॉर विमेन, पीस एंड सिक्योरिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी रोडम क्लिंटन ने उन्हें यह सम्मान दिया।
रीमा नानावटी भारत के स्व-नियोजित महिला संघ (सेवा) की निदेशक हैं। उनके नेतृत्व में यह संगठन देश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का सबसे बड़ा संघ बनकर उभरा है। नानावटी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान देती हैं। इसके लिए वह महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों और महिलाओं के नेतृत्व वाली आपूर्ति शृंखलाओं को बढ़ावा देती हैं।
उनके प्रयास ऊर्जा, कृषि व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, कचरा पुनर्चक्रण और कपड़ा उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार तथा आजीविका के अवसर तैयार करने पर केंद्रित हैं।
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नानावटी ने भूकंप से प्रभावित ग्रामीण महिलाओं के जीवन और आजीविका को दोबारा खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने संकटग्रस्त अफगानिस्तान और श्रीलंका में पुनर्वास कार्यक्रमों के प्रयासों का भी नेतृत्व किया। इसके अलावा, उन्होंने सेवा का खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया, जिससे लगभग 10 लाख परिवारों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
वह ‘हरियाली’ हरित ऊर्जा और आजीविका पहल का भी नेतृत्व कर रही हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच उपलब्ध कराना है। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उनके सामाजिक योगदान के लिए उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया था।
वर्ष 2026 के इस पुरस्कार के अन्य प्राप्तकर्ताओं में फैशन डिजाइनर और टोरी बर्च फाउंडेशन की संस्थापक टोरी बर्च तथा नोबेल पुरस्कार विजेता और ग्रामीण बैंक के संस्थापक मुहम्मद यूनुस शामिल हैं।
यह पुरस्कार हिलेरी क्लिंटन और जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय का संस्थान उन लोगों को प्रदान करता है, जो महिला अधिकारों को बढ़ावा देने और दुनिया को अधिक शांतिपूर्ण तथा सुरक्षित बनाने में असाधारण नेतृत्व दिखाते हैं।
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