कांग्रेस ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को कहा कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौता “कोई समझौता नहीं बल्कि देश के स्वाभिमान और हितों का आत्मसमर्पण” है। कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि यह समझौता किसानों, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए हानिकारक साबित होगा और अमेरिका के उत्पादों के लिए भारत को एक डंपिंग ग्राउंड बना देगा।
खेड़ा ने कहा, “यह समझौता हमारे स्वाभिमान और किसानों, MSMEs और मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ है। इसे समझौता कहना भी अनुचित है। यह तो आत्मसमर्पण है। नाम नरेंद्र है, काम आत्मसमर्पण। यह समझौता एक बार फिर इसे साबित करता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अब अमेरिका के समयानुसार काम कर रही है और सभी महत्वपूर्ण निर्णय, चाहे सैन्य संघर्ष में शांति की घोषणा हो या व्यापार समझौता, अमेरिका की अनुमति से लिए जा रहे हैं। खेड़ा ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा, जबकि अमेरिका से कोई समान प्रतिबद्धता नहीं है।
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इस सौदे के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को 50% से घटाकर 18% करेगा, जबकि भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुएं और खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करेगा। भारतीय व्यापारियों और MSMEs के लिए यह $30 ट्रिलियन का बाजार खोलेगा, जबकि कांग्रेस इसे भारत के हितों के खिलाफ और आत्मसमर्पण मान रही है।
पवन खेड़ा ने कहा कि पहले भारत अमेरिका और अन्य देशों के साथ बातचीत में बराबरी का दर्जा रखता था, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों की पीठ तोड़ देगा और आने वाले समय में देश की कृषि को नुकसान पहुंचेगा।
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