मध्य पूर्व में जारी युद्ध में ईरान ने इज़राइल पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। ईरान ने हाइफा और अशदोद में स्थित रणनीतिक तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में घबराहट फैल गई। हाइफा से घना धुआँ उठता हुआ देखा गया और इज़राइल की एयर डिफेंस प्रणाली पर भारी दबाव पड़ा।
मध्य पूर्व में संघर्ष अब 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ता जा रहा है। यह हालात तब और तनावपूर्ण हुए जब इज़राइल ने साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया और ईरान ने इसके जवाब में कड़ा प्रतिशोध किया। ईरान ने अब खाड़ी के देशों में तेल और गैस सुविधाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और अपने हमले का दायरा बढ़ाते हुए इज़राइल की प्रमुख हाइफा रिफाइनरी पर मिसाइलें दागीं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों की 65वीं लहर (Wave 65) का इस्तेमाल किया गया, जो पहली बार नसरल्लाह सिस्टम के माध्यम से तैनात की गई। इस हमले ने ईरान की सैन्य क्षमता में एक बड़ा उन्नयन दिखाया। हाइफा रिफाइनरी इज़राइल का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र है, जो देश की 50-60 प्रतिशत घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करता है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा से इज़राइल की ऊर्जा आपूर्ति, उद्योग और सैन्य लॉजिस्टिक्स पर गंभीर असर पड़ सकता है। हाइफा बंदरगाह भारत-इज़राइल व्यापार के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
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ईरान ने अब अपने हमले उत्तरी और दक्षिणी इज़राइल दोनों क्षेत्रों तक बढ़ा दिए हैं। कई मिसाइलें उत्तरी इलाकों की ओर दागी गईं, जिससे व्यापक आतंक और नुकसान हुआ। इज़राइल की एयर डिफेंस ने कई मिसाइलें रोक दीं, लेकिन उनका मलबा आवासीय इलाकों में गिरा और नुकसान हुआ। उत्तरी इज़राइल में उच्च सतर्कता जारी है।
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