शनिवार को इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या हुई। कई प्रमुख ईरानी नेता भी इस हमले में मारे गए। इसके तुरंत बाद ईरान ने प्रतिशोध स्वरूप नौ देशों में मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए। इन देशों में यूएई (विशेषकर दुबई), कतर, बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन, इराक और साइप्रस शामिल हैं।
विशेष रूप से दुबई पर हमला सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक दबाव के लिए था। दुबई गल्फ क्षेत्र का वित्तीय और व्यावसायिक केंद्र है, और यहां अस्थिरता वैश्विक बाजारों, बीमा लागत और व्यापार को प्रभावित कर सकती है। कतर में अल उदैद एयर बेस को निशाना बनाकर ईरान अमेरिका को सीधे संदेश दे रहा है।
बहरीन में स्थित अमेरिका का फिफ्थ फ़्लीट बेस और होर्मुज जलसंधि को निशाना बनाना समुद्री दबाव का संकेत है। लगभग 20-30% वैश्विक तेल आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन और इराक को भी निशाना बनाकर ऊर्जा और क्षेत्रीय रणनीतिक दबाव बढ़ाया है।
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साइप्रस पर हमले से संकेत मिलता है कि संघर्ष अब गल्फ से बाहर यूरोप और पश्चिमी शक्तियों तक फैल रहा है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि ये हमले उन देशों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनके क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और अन्य विदेशी सैन्य ठिकानों को लक्षित किया गया है, जिन्हें ईरान पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इस रणनीति का सार तीन-तरफा है:
- दुबई के माध्यम से आर्थिक दबाव
- कतर के माध्यम से हवाई और सैन्य दबाव
- बहरीन के माध्यम से समुद्री दबाव
यह स्पष्ट है कि अब संघर्ष केवल अमेरिका और इज़राइल के साथ सीमित नहीं है, बल्कि मध्य पूर्व के नौ देशों में फैलकर क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा रहा है।
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