पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिकी जमीनी सैनिक क्षेत्र में उतरे तो उन्हें “जला दिया जाएगा।” इस बीच पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की मेजबानी करने की घोषणा की है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि इस्लामाबाद दोनों देशों के बीच संवाद कराने के लिए तैयार है और उसे खुशी है कि अमेरिका और ईरान ने उस पर भरोसा जताया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत सीधे होगी या परोक्ष रूप से। तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के प्रतिनिधि इस्लामाबाद में बैठक में शामिल हुए, लेकिन बाद में लौट गए।
पाकिस्तान की पहल से कुछ घंटे पहले ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने इन वार्ताओं को महत्वहीन बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी सेना अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रही है और उन्हें कड़ी सजा देगी। यह बयान उस समय आया जब लगभग 2,500 अमेरिकी मरीन सैनिक मध्य पूर्व में तैनात किए गए हैं।
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ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के सैन्य और राजनीतिक नेताओं के घरों को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफघारी ने कहा कि यह प्रतिक्रिया ईरान के शहरों में नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में है।
इस बीच इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान में सैन्य अभियान बढ़ाने का संकेत दिया है। संघर्ष के चलते अब तक 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ड्रोन हमले, हवाई हमले और समुद्री तनाव के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
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