ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार (31 जनवरी 2026) को कहा कि अमेरिका के साथ संभावित वार्ता की दिशा में प्रगति हुई है, हालांकि इसी बीच ईरानी सेना प्रमुख ने वॉशिंगटन को किसी भी सैन्य हमले के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी ने कहा कि मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे कथित युद्ध उन्माद के विपरीत, बातचीत के लिए संरचनात्मक व्यवस्थाएं आगे बढ़ रही हैं।
लारीजानी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने ईरान के तट के पास यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत के नेतृत्व में युद्धपोत तैनात किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन उन्होंने साथ ही सैन्य कार्रवाई की संभावना को भी खुला रखा।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा कि व्यापक युद्ध से न केवल ईरान बल्कि अमेरिका और पूरे क्षेत्र को नुकसान होगा। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी से फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा और न ही वह इसे अपने हित में मानता है।
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कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने तेहरान में अली लारीजानी से मुलाकात कर क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयास किए।
अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती के बाद प्रत्यक्ष संघर्ष की आशंकाएं बढ़ गई हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह अमेरिकी ठिकानों, जहाजों और सहयोगियों, विशेष रूप से इज़राइल, पर मिसाइल हमले करेगा। ईरानी सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि उनकी सेनाएं पूरी तरह से रक्षात्मक और सैन्य तैयारियों में हैं।
तनाव के बीच ईरान में हाल की घटनाओं को लेकर अधिकारियों ने किसी भी हमले या तोड़फोड़ से इनकार किया है। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में नौसैनिक अभ्यास करेगी।
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