जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव को लेकर भारी हंगामा हुआ। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शुक्रवार को लाए गए राज्य का दर्जा प्रस्ताव को अध्यक्ष ने विधानसभा के निर्धारित नियमों में ढील देकर चर्चा के लिए स्वीकार किया।
23 विधायकों ने किया प्रस्ताव का समर्थन
भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने कहा कि पार्टी ने अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव दिया है और जब तक सदन इस पर फैसला नहीं करता, तब तक राथर को कार्यवाही से अलग रहना चाहिए। पठानिया ने नियम 215(2) का हवाला देते हुए दावा किया कि 23 विधायक प्रस्ताव के समर्थन में हैं।
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उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए और किसी अन्य व्यक्ति को इसकी जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। पठानिया ने लोकसभा में अध्यक्ष के खिलाफ हटाने के प्रस्ताव से जुड़े तीन उदाहरणों का भी उल्लेख किया।
हालांकि, अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि नियमों के अनुसार प्रस्ताव को पेश किए जाने के 14 दिन बाद ही कार्यसूची में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियम 215 में इस प्रक्रिया का स्पष्ट प्रावधान है। राथर ने बालराम जाखड़ और अन्य मामलों के उदाहरणों पर कहा कि उनमें सदन की अनुमति मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, इसलिए वे यहां लागू नहीं होते।
सदन में नारेबाजी और हंगामा
प्रश्नकाल शुरू होते ही भाजपा विधायक खड़े हो गए और राज्य का दर्जा प्रस्ताव पर आपत्ति जताने लगे। भाजपा सदस्यों ने स्पीकर के खिलाफ नारे लगाए और ‘कुर्सी छोड़ो’ के नारे लगाए। पठानिया ने सदन पर शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत और संविधान के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायक बलवंत मनकोटिया ने भी सत्तापक्ष पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद का समर्थन करने का आरोप लगाया।
हंगामा बढ़ने पर भाजपा विधायक विक्रम रंधावा और अरविंद गुप्ता तथा कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज लोन और इफ्तिखार अहमद को मार्शल के जरिए सदन से बाहर कराया गया। अध्यक्ष ने सदस्यों को अनुशासन और सदन की गरिमा बनाए रखने की चेतावनी दी।
राज्य का दर्जा प्रस्ताव में स्वायत्तता और 1953 से पहले की स्थिति के संदर्भों को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस सदस्यों ने भी नारेबाजी और बैनर प्रदर्शन किया। इसके चलते कार्यवाही में बार-बार व्यवधान आता रहा।
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