कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वेस्ट एशिया संघर्ष पर राज्यसभा में दिए गए भाषण की कड़ी आलोचना की है। जयराम रमेश ने कहा कि पीएम मोदी का भाषण "स्वयं की प्रशंसा से भरा पाठ" प्रतीत होता है और इसमें वास्तविक समाधान या रणनीति की स्पष्ट रूपरेखा नहीं दी गई।
उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत पर इसके प्रभाव के मुद्दों को केवल संक्षिप्त रूप में छुआ, जबकि यह देश और क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती है। जयराम रमेश ने कहा कि इस भाषण में केवल सरकारी तैयारियों और खुद की उपलब्धियों का विवरण था, न कि विस्तृत नीति या कूटनीतिक प्रयासों का विश्लेषण।
रमेश ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण विपक्ष और आम जनता के सामने उनके गंभीर प्रश्नों का उत्तर नहीं देता। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे एकतरफा और स्वयं-प्रशंसा वाले भाषण देश की नीतिगत गंभीरता और संसद की जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर सकते हैं।
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राज्यसभा में मोदी ने वेस्ट एशिया के युद्ध और इसके भारत पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की थी। उन्होंने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति, फारस की खाड़ी में नौवहन और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर सरकार की तैयारियों का उल्लेख किया। हालांकि, जयराम रमेश का मानना है कि इन बिंदुओं को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी तरीके से पेश किया जाना चाहिए था।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विपक्षी नेताओं की यह प्रतिक्रिया आगामी बजट सत्र और विदेश नीति पर सरकार की कार्यप्रणाली पर बहस को और बढ़ा सकती है।
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