विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर कहा है कि किसी भी पड़ोसी देश से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह केवल भारत के हितों के अनुसार ही काम करे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते तभी सुचारु रूप से आगे बढ़ सकते हैं, जब वे आपसी हित और सम्मान की कसौटी पर खरे उतरें।
नई दिल्ली में शनिवार को जयशंकर से बांग्लादेश की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की लगातार की जा रही मांग के बारे में सवाल पूछा गया था।
जयशंकर ने कहा कि किसी भी रिश्ते को सफल बनाने के लिए उसमें दोनों पक्षों का हित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के हितों को भी उचित रूप से समझना और उनका सम्मान करना चाहिए। इसी तरह भारत भी अपने पड़ोसी देशों से यही अपेक्षा रखता है। जब दोनों पक्षों के बीच साझा आधार बनता है, तभी रिश्ते बेहतर तरीके से आगे बढ़ते हैं।
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विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और बांग्लादेश 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद प्रभावित हुए द्विपक्षीय संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
शेख हसीना को अगस्त 2024 में छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद सत्ता से हटना पड़ा था। वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। इसके बाद ढाका ने कई बार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा।
हालांकि, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। रहमान के भारत दौरे की भी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, उनके कार्यालय ने शुक्रवार को कहा कि ढाका ने अभी तक नई दिल्ली के निमंत्रण का जवाब नहीं दिया है।
भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने हाल के सप्ताहों में बांग्लादेश के शीर्ष नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद रहमान की भारत यात्रा जल्द होनी चाहिए।
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