भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर सोमवार को संसद में पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात पर विस्तृत जानकारी देंगे। यह बयान तब आएगा जब संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण दोबारा शुरू होगा। लोकसभा के संशोधित कार्यसूची के अनुसार, जयशंकर क्षेत्र में बढ़ते तनाव और भारत की कूटनीतिक स्थिति पर आधिकारिक वक्तव्य देंगे।
पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। इस बीच भारत सरकार खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी करीबी नजर रखे हुए है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल के दिनों में कई क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत की है। इनमें ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, कुवैत के नेता शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने इन नेताओं के साथ बातचीत में हालिया हमलों पर चिंता जताई और क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
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इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से भी चर्चा की। भारत ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन दोहराया है।
संघर्ष उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में विस्फोटों की खबरें आईं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार हिंसा में कई लोगों की मौत हुई, जिनमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कुछ वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं।
इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई जगहों पर हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा और बुर्ज खलीफा के आसपास भी हमले की खबरें आईं, जबकि बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
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