जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मंगलवार को आतंकवादी संगठनों से कथित संबंधों के आरोप में पांच और सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 (2)(c) के तहत की गई है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बिना किसी विभागीय जांच के कर्मचारियों को बर्खास्त करने की अनुमति देता है।
इन पांच कर्मचारियों को हटाए जाने के साथ ही वर्ष 2021 से अब तक बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर 89 हो गई है। वर्ष 2021 में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस तरह की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी। प्रशासन का कहना है कि इन कर्मचारियों की गतिविधियां और संपर्क राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माने गए।
अधिकारियों के अनुसार, जिन कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया है, उनके खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों से मिली खुफिया रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई की गई। प्रशासन का तर्क है कि संवेदनशील क्षेत्र में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
और पढ़ें: गणतंत्र दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर के सांबा में पाकिस्तान की ड्रोन से हथियार तस्करी की कोशिश नाकाम
अनुच्छेद 311 (2)(c) के तहत की गई इन बर्खास्तगियों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस भी तेज हो गई है। जहां सरकार इसे आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम बता रही है, वहीं कुछ संगठनों और नेताओं का कहना है कि बिना जांच के बर्खास्तगी से कर्मचारियों के अधिकारों पर सवाल उठते हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल उन्हीं मामलों में उठाया जा रहा है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी तंत्र में किसी भी तरह की आतंक समर्थक गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी ऐसी सूचनाओं पर सख्त और त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि राज्य में शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
और पढ़ें: वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज से प्रभावित 50 MBBS छात्रों को समायोजित करेंगे: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री