जम्मू-कश्मीर के शोपियां में पुलिस ने आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने वाले एक कथित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क जेल के भीतर से संचालित किया जा रहा था और इसके तार आतंकियों तथा जेलों में बंद उनके सहयोगियों से जुड़े होने की आशंका है।
पुलिस ने संदिग्ध डिजिटल वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान इस मॉडल का पता लगाया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए आम लोगों से पैसे जुटाते थे। इसके बाद इस रकम को कथित तौर पर वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से आतंकी संगठनों तक पहुंचाया जाता था।
लश्कर और टीआरएफ को मदद पहुंचाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, जुटाई गई रकम का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) की गतिविधियों को आर्थिक और लॉजिस्टिक सहायता देने में किया जा रहा था। इस धन से आतंकियों के लिए स्मार्टफोन समेत अन्य जरूरी सामान खरीदे जाने की बात भी सामने आई है।
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इस संबंध में शोपियां पुलिस थाने में कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने, वित्तीय लेनदेन का पता लगाने और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
नशा और आतंकवाद के गठजोड़ पर भी पुलिस की कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर पुलिस पिछले छह महीनों से नशा तस्करी और आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है। पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात के अनुसार, इस अभियान के तहत कुल 3,257 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 2,500 से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है और 4,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन मामलों में 170 दोषसिद्धियां भी हुई हैं।
पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत कार्रवाई करते हुए नशा तस्करों और सक्रिय या फरार आतंकियों से जुड़ी संपत्तियां जब्त की हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 288 संपत्तियां जब्त की गई हैं। इनकी कुल कीमत 178 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इसके अलावा 80 लाख रुपये से ज्यादा नकदी भी जब्त की गई है।
पुलिस का कहना है कि आतंकवाद और नशा तस्करी को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।
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