झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आगामी जनगणना में सरना जनजातीय पहचान के लिए अलग कोड शामिल करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पत्र में कहा कि सरना समुदाय की अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए अलग कोड आवंटित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम जनजातीय समाज की विशिष्ट पहचान को बनाए रखने और उसे आधिकारिक मान्यता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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पत्र में वर्ष 2020 में झारखंड विधानसभा द्वारा पारित सरना कोड से संबंधित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया गया है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही इस मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता जता चुकी है और अब केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि इसे आगामी जनगणना में शामिल किया जाए।
सरना धर्म प्रकृति पूजक आदिवासी समुदायों की आस्था और परंपराओं से जुड़ा हुआ है, और लंबे समय से इसे अलग धार्मिक कोड की मान्यता देने की मांग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मांग किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए की जा रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि जनगणना प्रक्रिया में इस विषय को गंभीरता से लिया जाए ताकि आदिवासी समाज को उचित पहचान मिल सके।
यह मुद्दा झारखंड सहित कई आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लंबे समय से चर्चा में रहा है।
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