जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में मंगलवार को उस समय विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया जब छात्रों ने आरोप लगाया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर को हॉस्टल मेस से बिना किसी सूचना के हटा दिया गया। यह घटना तपती हॉस्टल में हुई, जिसके बाद बड़ी संख्या में छात्र मौके पर एकत्र हो गए।
छात्रों ने नारेबाजी करते हुए मांग की कि अंबेडकर की तस्वीर को तुरंत मेस हॉल में वापस लगाया जाए। इस मुद्दे पर जेएनयू छात्र संघ ने भी कड़ा विरोध जताया और इसे कैंपस में “जातिगत असंवेदनशीलता के व्यापक पैटर्न” का हिस्सा बताया।
छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि यह विरोध तपती हॉस्टल की वार्डन विनिका जोशी द्वारा तस्वीर हटाए जाने के खिलाफ है। उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि हाल के समय में कैंपस में इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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अदिति मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले महीने कुलपति द्वारा की गई कथित जातिगत टिप्पणियों के बाद से माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ संगठनों से जुड़े लोग विश्वविद्यालय के माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि डॉ. अंबेडकर देश के संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं, इसलिए उनकी तस्वीर हटाना अस्वीकार्य है।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और छात्र लगातार अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन छात्रों का विरोध जारी है।
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