कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के सांसदों के लिए अलग सीटिंग व्यवस्था की मांग की है। यह मांग उस राजनीतिक बदलाव के बाद की गई है, जिसमें द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (DMK) ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है।
कनिमोझी ने अपने पत्र में कहा कि बदलते राजनीतिक हालातों के कारण अब दोनों पार्टियों के सांसदों का एक साथ बैठना उचित नहीं है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि DMK संसदीय दल के लिए अलग ब्लॉक की व्यवस्था की जाए, ताकि उनके सांसद सदन में बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।
उन्होंने कहा, “मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि बदलते राजनीतिक हालातों को देखते हुए लोकसभा में DMK सांसदों की सीटिंग व्यवस्था में उचित बदलाव किया जाए। अब जब कांग्रेस के साथ हमारा गठबंधन समाप्त हो चुका है, तो साथ बैठना उपयुक्त नहीं होगा।”
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कनिमोझी ने आगे कहा कि DMK सांसदों को अलग सीटिंग दी जानी चाहिए ताकि वे बिना किसी राजनीतिक असहजता के अपने कार्यों का निर्वहन कर सकें।
इसी बीच DMK ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पार्टी ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि कांग्रेस ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया और चुनाव परिणामों के बाद “विश्वासघात” किया है। DMK नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान भी गठबंधन के हितों के खिलाफ काम किया।
पार्टी ने यह भी कहा कि कांग्रेस का रवैया भाजपा (BJP) जैसी राजनीतिक रणनीतियों जैसा रहा है, जिससे गठबंधन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने संसद और दक्षिण भारतीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जहां गठबंधन राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
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