कर्नाटक कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद के संकेत उस समय सामने आए, जब पार्टी के वरिष्ठ विधायक टीबी जयचंद्र ने राज्य में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने नए मंत्रियों के प्रशासनिक अनुभव और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके समर्थक और विधानसभा क्षेत्र के लोग उन्हें सरकार से इस्तीफा देकर बाहर आने की सलाह दे रहे हैं।
जयचंद्र ने कहा कि मंत्रियों के पदों में बार-बार बदलाव से जनता के बीच राज्य सरकार की नकारात्मक छवि बनी है। सीरा विधानसभा सीट से विधायक जयचंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार कावेरी जल विवाद, सूखे और अन्य समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं दिख रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मतदाताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि यह विस्तार राज्य के हित में हुआ है या कांग्रेस पार्टी के हित में। जयचंद्र ने यहां तक कहा कि मौजूदा सरकार उन्हें कांग्रेस की सरकार के बजाय “सर्वदलीय सरकार” जैसी लगती है।
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जयचंद्र ने मंत्रियों में अनुभव और प्रशासनिक क्षमता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान कर पा रही है।
टीबी जयचंद्र सीरा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार, 2008, 2013 और 2023 में चुनाव जीत चुके हैं। उन्हें कर्नाटक मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया। बाद में उन्हें प्रोटेम स्पीकर का पद देने की पेशकश की गई, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।
जयचंद्र ने बताया कि वह करीब 56 साल पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे और 1978 में पहली बार विधायक बने। उन्होंने कहा कि उन्होंने गांधी परिवार की चार पीढ़ियों—इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी—को करीब से देखा है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में मल्लिकार्जुन खरगे के बाद वह सबसे वरिष्ठ नेताओं में हैं, लेकिन उनके अनुभव और उनके विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की आकांक्षाओं का पर्याप्त उपयोग नहीं किया जा रहा है।
जयचंद्र की नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार में पार्टी के विभिन्न धड़ों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में उनके बयान पार्टी के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकते हैं।
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