ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद होने और सड़कों पर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच वहां पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्रों से संपर्क टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में उनके अभिभावकों में भारी दहशत का माहौल है। गुरुवार (15 जनवरी 2026) को कई कश्मीरी माता-पिता ने बताया कि वे कई दिनों से अपने बच्चों से बात नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी चिंता और डर बढ़ गया है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत की और ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों और उनके परिवारों की चिंता को देखते हुए केंद्र सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने दावा किया है कि भारतीय छात्रों का पहला जत्था शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को भारत लौट सकता है। संगठन ने बताया कि लगातार प्रयासों के बाद भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बन रहा है, ताकि छात्रों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जा सके।
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श्रीनगर में रहने वाली एक छात्रा की मां फहमीदा जान ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “मैं कई दिनों से अपनी बेटी से बात नहीं कर पाई हूं। ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने की खबरों ने हम सभी को डरा दिया है।”
अभिभावकों का कहना है कि इंटरनेट बंद होने के कारण छात्रों की स्थिति के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही है। इससे अफवाहें फैल रही हैं और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। कई परिवारों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि ईरान में मौजूद छात्रों के लिए विशेष उड़ानों या वैकल्पिक सुरक्षित मार्गों की व्यवस्था की जाए।
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