जम्मू-कश्मीर में खेल प्रतियोगिताओं के चयन को लेकर उठे विवाद के बीच उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि खेलों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए और हर चयन प्रक्रिया को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि खेलों पर राजनीति हावी हो जाती है, जबकि खेलों का उद्देश्य युवाओं को जोड़ना और उनकी प्रतिभा को निखारना होना चाहिए।
जम्मू के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के खेल सम्मेलन ‘नेशनल लेवल स्पोर्ट्स कॉन्फ्रेंस – सृजन (SRIJAN)’ को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि खेलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता आवश्यक है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि बिना ठोस तथ्यों के आरोप न लगाए जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चयनकर्ताओं की मंशा पर बार-बार सवाल उठाने से खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है।
उपराज्यपाल के ये बयान ऐसे समय आए हैं, जब जम्मू-कश्मीर में दो प्रमुख खेल आयोजनों को लेकर क्षेत्रीय पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता संतोष ट्रॉफी और 69वें राष्ट्रीय स्कूल खेलों के तहत अंडर-14 बालक क्रिकेट टीम का चयन शामिल है। आलोचकों का दावा है कि इन दोनों ही चयन प्रक्रियाओं में जम्मू क्षेत्र की तुलना में कश्मीर क्षेत्र के खिलाड़ियों को अधिक तरजीह दी गई।
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गौरतलब है कि पिछले महीने संतोष ट्रॉफी के लिए जम्मू-कश्मीर टीम के चयन को लेकर काफी हंगामा हुआ था। 20 सदस्यीय टीम में से 19 खिलाड़ियों के कश्मीर से होने पर सवाल उठे थे, जिसके बाद केंद्र शासित प्रदेश के खेल मंत्री सतीश शर्मा ने चयन प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए थे।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि खेलों को क्षेत्रीय या राजनीतिक विवादों में घसीटना सही नहीं है और सभी पक्षों को संयम बरतते हुए खेल भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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