वर्ष 2025 भारतीय कूटनीति के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण रहा, जब वैश्विक मंच पर भारत ने कई बड़े फैसले लिए और रणनीतिक साझेदारियों को नई दिशा दी। अमेरिका, यूरोप, एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका तक फैली कूटनीतिक गतिविधियों ने भारत की विदेश नीति को मजबूती प्रदान की।
इस साल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए टैरिफ ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को सुर्खियों में ला दिया। भारत ने इस पर कूटनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए संवाद के माध्यम से अपने हितों को सामने रखा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों की यात्रा की, जहां ऊर्जा, खनिज संसाधन, रक्षा सहयोग और विकासात्मक साझेदारी पर अहम समझौते हुए।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय संसद के प्रतिनिधिमंडलों ने कई देशों का दौरा किया। इन यात्राओं का उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने स्पष्ट करना और समर्थन जुटाना था। इन प्रयासों से भारत की सुरक्षा चिंताओं को वैश्विक मंच पर व्यापक समझ मिली।
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2025 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा भी एक अहम कूटनीतिक घटना रही। इस दौरान रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को लेकर कई समझौतों पर सहमति बनी, जिससे भारत-रूस संबंध और मजबूत हुए। वहीं, भारत ने यूनाइटेड किंगडम और ओमान के साथ व्यापार समझौते कर आर्थिक कूटनीति को नई गति दी।
इस वर्ष भारत ने कनाडा के साथ तनावपूर्ण रिश्तों को सुधारने की दिशा में भी कदम बढ़ाए और राजनयिक संवाद को फिर से सक्रिय किया। इसके अलावा, अफगानिस्तान में तालिबान के साथ सीमित लेकिन व्यावहारिक संपर्क बढ़ाकर भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय सहायता के मुद्दों पर अपनी उपस्थिति बनाए रखी।
कुल मिलाकर, 2025 में भारत की कूटनीति बहुआयामी रही, जिसमें सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और वैश्विक राजनीति सभी क्षेत्रों में संतुलित और सक्रिय भूमिका निभाई गई।
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