उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित छह राज्यों के बीच बहुप्रतीक्षित किशाऊ जलविद्युत एवं जल भंडारण परियोजना को लेकर सहमति बन गई है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए सभी राज्यों ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई है।
यह परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना नदी की एक सहायक नदी है। यह स्थान उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर स्थित है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत संरचना में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत हिस्सेदारी वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च संबंधित राज्य सरकारों द्वारा साझा किया जाएगा।
और पढ़ें: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने युवाओं से संविधान से प्रेरणा लेकर विकसित भारत के सपने को साकार करने का आह्वान किया
किशाऊ बांध परियोजना को क्षेत्रीय जल प्रबंधन, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और जलविद्युत उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना से न केवल बिजली उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि आसपास के राज्यों में जल आपूर्ति की स्थिति भी मजबूत होगी।
सभी राज्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए आपसी समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही, पर्यावरणीय प्रभावों और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से उत्तर भारत के कई राज्यों को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि किशाऊ परियोजना यमुना बेसिन में जल प्रबंधन के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है, जिससे जल संकट को कम करने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अब सभी राज्यों द्वारा औपचारिक एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
और पढ़ें: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने ढलाई जिले में 15 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया