मणिपुर में लोकप्रिय सरकार की बहाली को लेकर केंद्र सरकार के प्रयासों के बीच कुकी-जो काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य के 10 कुकी-जो विधायक सरकार में शामिल होते हैं तो “अराजकता पैदा हो सकती है।” उनका कहना है कि 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद लोग अब भी भावनात्मक और संवेदनशील स्थिति में हैं।
The Indian Witness को दिए एक साक्षात्कार में थांगलेट ने कहा कि अलग प्रशासन की मांग को लेकर सबसे पहले कुकी-जो विधायकों ने ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में 10 कुकी-जो विधायक हैं, जिनमें से 7 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय लोकप्रिय सरकार बनाना “स्वस्थ कदम नहीं” होगा और बेहतर होगा कि राष्ट्रपति शासन को कम से कम एक और वर्ष तक जारी रखा जाए। उल्लेखनीय है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। केंद्र सरकार राज्य में फिर से जनप्रतिनिधियों की सरकार बहाल करने पर विचार कर रही है, जिसके लिए कुकी-जो विधायकों की भागीदारी अहम मानी जा रही है।
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मई 2023 में कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद पहाड़ी और घाटी जिलों के बीच बफर जोन बनाए गए थे। इन इलाकों में कई बार झड़पें और हिंसक घटनाएं हुई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-2, जो कांगपोकपी जिले से होकर गुजरता है और इम्फाल को नागालैंड व असम से जोड़ता है, उस पर आवाजाही भी प्रभावित रही है। इसी तरह कुकी-जो समुदाय के लोग इम्फाल हवाई अड्डे तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
थांगलेट ने कहा कि राष्ट्रपति शासन के दौरान सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन शांति पूरी तरह स्थापित होना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि अभी लोकप्रिय सरकार बनी तो हिंसा दोबारा भड़क सकती है।
उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने 4 सितंबर 2025 को कुकी-जो उग्रवादी समूहों के साथ निलंबन-ऑपरेशन (SoO) समझौते को बढ़ाया है और बातचीत शुरू की है। समुदाय को उम्मीद है कि भविष्य में केंद्र उनकी अलग प्रशासन—विधानसभा सहित केंद्रशासित प्रदेश—की मांग पर विचार कर सकता है।
हिंसा में अब तक करीब 250 लोगों की मौत हुई और 60 हजार लोग विस्थापित हुए। पिछले एक महीने में लगभग 9 हजार लोग लौटे हैं, लेकिन थांगलेट के अनुसार अभी तक कोई भी कुकी-जो परिवार सुरक्षित रूप से अपने घर नहीं लौट पाया है।
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