छत्तीसगढ़ में बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग पर उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब भंवरटंक सुरंग के भीतर रेलवे पटरी पर एक तेंदुआ चलता हुआ दिखाई दिया। लोकोमोटिव में मौजूद चालक ने समय रहते जानवर को देख लिया और संभावित टक्कर से बचने के लिए ट्रेन की गति धीमी कर दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन खोंगसरा-भंवरटंक खंड से गुजर रही थी। इसी दौरान लोको पायलट की नजर सुरंग के अंदर पटरी पर चल रहे तेंदुए पर पड़ी। चालक दल ने तुरंत ट्रेन की रफ्तार कम कर दी, जिससे तेंदुए को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने का पर्याप्त समय मिल गया।
तेंदुआ रेलवे की दोनों पटरियों के बीच शांतिपूर्वक चलता नजर आ रहा है और उसके पीछे धीमी गति से ट्रेन आगे बढ़ रही है। कुछ दूरी तक सुरंग में चलने के बाद तेंदुआ रेलवे मार्ग से बाहर निकल गया और आसपास के जंगल में गायब हो गया।
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यह इलाका घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही आम मानी जाती है। तेंदुए के अलावा हाथी और अन्य जंगली जानवर भी कई बार जंगल से गुजरते हुए रेलवे पटरियों के आसपास पहुंच जाते हैं। इससे ट्रेन और वन्यजीवों के बीच टक्कर का खतरा बढ़ जाता है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ा दी। अधिकारियों ने यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि तेंदुआ रेलवे गलियारे के आसपास तो नहीं है।
इस घटना ने वन क्षेत्र से गुजरने वाली रेल पटरियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर पैदल पटरी की जांच और रखरखाव करने वाले रेलवे कर्मचारियों के लिए ऐसे इलाकों में जंगली जानवरों का सामना करना जोखिम भरा हो सकता है।
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