महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (एमडब्ल्यूडीटी) ने सोमवार को ओडिशा का अपना पांच दिवसीय दौरा पूरा कर लिया। यह दौरा पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के साथ चल रहे जल बंटवारे के विवाद के बीच किया गया। अधिकारियों के अनुसार न्यायाधिकरण ने महानदी बेसिन से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया।
दौरे के अंतिम दिन न्यायाधिकरण की टीम पुरी जिले के सतपाड़ा जेटी पहुंची, जहां से उन्होंने विश्व प्रसिद्ध चिलिका झील का भ्रमण किया। इस दौरान जल प्रवाह, जल उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि न्यायाधिकरण ने क्षेत्रीय परिस्थितियों और स्थानीय प्रभावों को समझने के लिए जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया।
ओडिशा के महाधिवक्ता पीताम्बर आचार्य, पुरी के जिलाधिकारी दिव्य ज्योति परिडा और पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह भी इस दौरे के दौरान न्यायाधिकरण के साथ मौजूद रहे। उन्होंने न्यायाधिकरण को संबंधित जानकारियां उपलब्ध कराईं और राज्य सरकार का पक्ष रखा।
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महानदी जल विवाद ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चला आ रहा है। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी हिस्से में बनाए जा रहे बांधों और परियोजनाओं से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ रहा है, जिससे राज्य के किसानों और आम जनता को नुकसान हो रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ का कहना है कि वह अपने हिस्से के जल का वैध उपयोग कर रहा है।
न्यायाधिकरण का यह दौरा दोनों राज्यों के दावों और तथ्यों की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि विस्तृत अध्ययन और निरीक्षण के आधार पर न्यायाधिकरण आगे की कार्यवाही करेगा और जल बंटवारे के मुद्दे पर संतुलित समाधान की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
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