महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति को बड़ी सफलता मिली है। राज्यभर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों के कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इन चुनावों के लिए मतदान 15 जनवरी को होना है, लेकिन इससे पहले ही कई सीटों पर मुकाबला समाप्त हो गया।
भाजपा नेता केशव उपाध्ये ने शुक्रवार (2 जनवरी, 2026) को बताया कि निर्विरोध चुने गए 68 उम्मीदवारों में से 44 अकेले भाजपा के हैं। यह आंकड़ा शहरी स्थानीय निकायों में पार्टी की बढ़ती पकड़ को दर्शाता है। निर्विरोध निर्वाचित होने वाले उम्मीदवारों की सबसे अधिक संख्या ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम से है। इसके बाद पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर का स्थान है।
पुणे के वार्ड नंबर 35 से भाजपा उम्मीदवार मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप अपने विरोधियों द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद निर्विरोध चुने गए। दोनों 2017 से 2022 के बीच भी इसी वार्ड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
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इन जीतों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता मुरलीधर मोहोल ने कहा कि पुणे का अगला महापौर भाजपा से ही होगा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का लक्ष्य 125 सीटें जीतने का है, जिनमें से दो सीटें पहले ही निर्विरोध जीत ली गई हैं और 123 सीटों पर अभी मुकाबला बाकी है। उन्होंने इसे पार्टी के सुशासन का प्रमाण बताया।
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 22 उम्मीदवार भी निर्विरोध चुने गए हैं, जबकि अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दो उम्मीदवारों को यह सफलता मिली है। भाजपा नेताओं ने इस रुझान का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता और प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की प्रभावी चुनावी रणनीति को दिया है। नेताओं का कहना है कि इसी कारण भाजपा न केवल नगर परिषदों बल्कि बड़े नगर निगमों में भी एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है।
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