महाराष्ट्र में 12 जिला परिषद और 125 पंचायत समितियों के चुनाव शनिवार (7 फरवरी) को लगभग 67 प्रतिशत मतदान के साथ संपन्न हुए। यह मतदान उपमुख्यमंत्री अजित पवार की 28 जनवरी को विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद हुआ, जिसके चलते राज्य में तीन दिन के शोक के कारण 5 फरवरी का मतदान टाल दिया गया था।
मतदान रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सतारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर जिलों में 25,471 मतदान केंद्रों पर हुआ। दोपहर 1:30 बजे तक 37.94 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो 3:30 बजे तक 52.02 प्रतिशत हो गया और शाम 5:30 बजे तक 67 प्रतिशत पर पहुंच गया। अंतिम आंकड़े रविवार को जारी होंगे, जबकि मतगणना 9 फरवरी को होगी।
इन चुनावों को अजित पवार के निधन के बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के बीच अनौपचारिक गठबंधन की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को गर्म रखा। पुणे, सतारा, सोलापुर और सांगली जैसे मजबूत गढ़ों में दोनों गुट ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर साथ लड़ते नजर आए। जमीनी स्तर पर इसे “अजित दादा को श्रद्धांजलि” बताया गया, हालांकि प्रफुल्ल पटेल ने इसे “रणनीतिक सहमति” कहा। जयंत पाटिल ने दावा किया कि पार्टी का विलय अजित पवार की “अंतिम इच्छा” थी और 12 फरवरी को घोषणा संभव है।
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इन चुनावों में 731 जिला परिषद सीटों के लिए 2,624 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 369 महिलाएं, 83 एससी, 25 एसटी और 191 ओबीसी उम्मीदवार शामिल थे। पंचायत समिति की 1,462 सीटों के लिए 4,814 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। कुल मतदाता संख्या 2 करोड़ से अधिक रही।
राज्य निर्वाचन आयोग ने 1.28 लाख कर्मचारियों को तैनात किया और बड़ी संख्या में ईवीएम का उपयोग किया। महायुति गठबंधन की हालिया जीतों के बाद इन चुनावों के नतीजे स्थानीय राजनीति की दिशा तय करेंगे।
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