पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पुराने मतदाता सूची के आधार पर दोबारा चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाना था। उन्होंने कहा कि एसआईआर अब सत्तारूढ़ दल के लिए “विशेष प्रोत्साहन” बन गया है। ममता ने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर शुरू होने से पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए और प्रक्रिया के दौरान 34 लाख नाम और हटा दिए गए। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी के दावे हैं और स्वतंत्र रूप से इन आंकड़ों की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
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ममता ने कहा कि अगर भाजपा को अपनी जीत पर भरोसा है तो पश्चिम बंगाल में पुराने मतदाता रिकॉर्ड के आधार पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव दोबारा कराए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दलों का गठबंधन जल्द बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा। उन्होंने समर्थकों से सत्तारूढ़ व्यवस्था के खिलाफ “जन आंदोलन” की अपील की।
यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर समेत कई मुद्दों पर मतभेद की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।
चुनाव आयोग ने इसके जवाब में कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया है और उसके फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाते हैं।
मामले को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है, जबकि आयोग ने अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया है।
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