पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग स्थापित प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है और मतदाताओं से बार-बार अपनी पात्रता साबित करने की मांग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने एसआईआर प्रक्रिया को “यांत्रिक” बताते हुए कहा कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपने ही पहले से मौजूद तंत्रों को दरकिनार कर रहा है और मौजूदा तरीका “मनमाना, तर्कहीन और संविधान की भावना व शब्द दोनों के खिलाफ” है।
यह तीसरा पत्र है जो ममता बनर्जी ने सीईसी को लिखा है, जब से चुनाव आयोग ने चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य न तो मतदाता सूची में सुधार करना दिखता है और न ही योग्य मतदाताओं को शामिल करना, बल्कि इसका मकसद केवल नाम हटाना और मतदाताओं को बाहर करना प्रतीत होता है।
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ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में मतदाताओं को उनके दस्तावेज जमा करने की कोई रसीद तक नहीं दी जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एआई आधारित सत्यापन के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने का खतरा बढ़ गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की प्रक्रियाएं जारी रहीं तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनावों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करे और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शी, न्यायसंगत और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाए।
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